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06.07.2026 10:24 AM
ब्रेंट (Brent): मूल्य विश्लेषण और पूर्वानुमान – तत्काल डिलीवरी के लिए बाजार में आपूर्ति अधिक होने से दबाव बना हुआ है।

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2023 की शुरुआत से तेल उत्पादन पर नियंत्रण रखने वाले OPEC+ के सात देशों का समूह अब उत्पादन कोटा बढ़ाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। यह प्रक्रिया अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुई थी, जिसने हाल ही में मध्य पूर्व (Middle East) में संघर्ष को जन्म दिया। इसी बीच, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने OPEC से अलग होने के बाद रिकॉर्ड मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात शुरू कर दिया है।

Reuters के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, OPEC+ (जिसमें सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कज़ाखस्तान और ओमान शामिल हैं) अगस्त में प्रति दिन 1.88 लाख बैरल उत्पादन कोटा बढ़ा सकता है। यह बढ़ोतरी जुलाई में किए गए समान उत्पादन विस्तार के बाद होगी, जिसके इस बार वास्तव में लागू होने की संभावना पहले की तुलना में अधिक है।

सैन्य संघर्ष शुरू होने के बाद OPEC+ ने कई बार उत्पादन बढ़ाने की घोषणा की थी, लेकिन ये योजनाएं लागू नहीं हो सकीं क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने के फैसले ने तेल उत्पादन को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया था। इसके कारण क्षेत्र के उत्पादकों को तेल का भंडारण (Stockpiling) करना पड़ा और अंततः कई तेल कुओं को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। इस स्थिति का सबसे अधिक असर इराक पर पड़ा, जहां उत्पादन 40 लाख बैरल प्रतिदिन से घटकर 20 लाख बैरल प्रतिदिन से भी कम रह गया।

अब उत्पादन बढ़ाने के हालिया फैसलों का उद्देश्य संभवतः बाजार को यह भरोसा दिलाना है कि हालात सामान्य होने के साथ खाड़ी देश तेजी से उत्पादन बढ़ाने के लिए तैयार हैं। वहीं रूस और कज़ाखस्तान, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से सीधे प्रभावित नहीं हुए थे, वे भी मध्य पूर्व से कम हुई आपूर्ति की भरपाई के लिए अपना उत्पादन बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

हालांकि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने लगभग 60 वर्षों की सदस्यता के बाद OPEC छोड़ दिया है और अब स्वतंत्र रूप से काम करने का फैसला किया है। इसके बाद से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि देश अपने तेल उत्पादन और निर्यात में तेजी से बढ़ोतरी करेगा। फिलहाल उसका मुख्य ध्यान तेल निर्यात को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने पर है।

पिछले सप्ताह Reuters ने बताया कि जून में UAE ने रिकॉर्ड मात्रा में कच्चे तेल का निर्यात किया, जो Kpler के अनुसार औसतन 37 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। वहीं Vortexa के विश्लेषकों का अनुमान है कि यह आंकड़ा 40 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था।

Kpler के वरिष्ठ विश्लेषक जोहान्स राउबॉल (Johannes Rauball) ने Reuters से बातचीत में कहा कि निर्यात में वृद्धि के पीछे कई कारण हैं। इनमें होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही का फिर से शुरू होना भी शामिल है, जिससे पहले फंसे हुए टैंकरों की आवाजाही संभव हो सकी। उन्होंने यह भी बताया कि उनके अनुमान के अनुसार UAE की तेल आपूर्ति अब लगभग युद्ध-पूर्व स्तर के करीब पहुंच गई है।

हालांकि, Kpler का यह भी कहना है कि रिकॉर्ड निर्यात का एक कारण पिछले पांच महीनों के संघर्ष के दौरान टैंकों में जमा किया गया तेल भी है। इसका मतलब यह है कि जैसे-जैसे यह भंडार खत्म होगा और वास्तविक उत्पादन पूरी तरह नहीं बढ़ेगा, भविष्य में निर्यात और आपूर्ति में फिर से कमी आ सकती है।

इस पूरी स्थिति ने एक बार फिर उस सवाल को जन्म दिया है जिस पर विशेषज्ञ पिछले कई वर्षों से चर्चा कर रहे हैं—क्या OPEC ने वैश्विक तेल बाजार पर अपना प्रभाव खो दिया है?

फिलहाल इसका जवाब 'नहीं' माना जा रहा है। इसकी वजह यह है कि कज़ाखस्तान ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि उसकी OPEC+ छोड़ने की कोई योजना नहीं है, जबकि इराक ने भी उत्पादन बढ़ाने के लिए संगठन से अलग होने के अपने विचार को जल्दी ही वापस ले लिया। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि वैश्विक तेल बाजार पर OPEC का प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा, जिसका सबसे बड़ा कारण अमेरिका का दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक बन जाना है।

दिलचस्प बात यह है कि UAE ने OPEC से अलग होने का फैसला ऐसे समय में लिया, जब अमेरिका लगातार मजबूत प्रतिस्पर्धी बना हुआ है और जरूरत पड़ने पर तेजी से उत्पादन बढ़ा सकता है। इसका उदाहरण मई में देखने को मिला, जब अमेरिका का तेल उत्पादन लगभग 1.4 करोड़ बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

इन परिस्थितियों के कारण तेल की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है, जो अमेरिका, UAE और OPEC+—तीनों के लिए अनुकूल नहीं है। अमेरिकी रिकॉर्ड उत्पादन और होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकरों की सामान्य आवाजाही बहाल होने की खबरों के बाद वैश्विक ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई (Benchmark) तेल कीमतें फिर से युद्ध-पूर्व स्तरों पर लौट आई हैं।

तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis)

तकनीकी दृष्टि से कच्चा तेल (Crude Oil) फिलहाल महत्वपूर्ण 200-दिवसीय सरल मूविंग एवरेज (200-day SMA) से नीचे कारोबार कर रहा है। अधिकांश ऑसिलेटर (Oscillators) नकारात्मक संकेत दे रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि फिलहाल बाजार में बिकवाली (Bears) का दबदबा बना हुआ है।

हालांकि, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) पिछले कुछ दिनों में कई बार ओवरसोल्ड (Oversold) क्षेत्र में पहुंचा है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में बिकवाली की गति धीमी पड़ सकती है या कीमतों में एक अल्पकालिक रिकवरी (Pullback) देखने को मिल सकती है।

फिर भी, यदि ऐसी रिकवरी होती है, तो 200-दिवसीय SMA के आसपास मजबूत रेजिस्टेंस (Resistance) मिलने की संभावना है, जो विक्रेताओं के लिए दोबारा बिक्री का अवसर बन सकता है। दूसरी ओर, यदि कीमत इस महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल रहती है, तो खरीदारों (Bulls) को आगे और तेजी का मौका मिल सकता है।

Irina Yanina,
InstaForex के विश्लेषणात्मक विशेषज्ञ
© 2007-2026
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